मुहम्मद ﷺ का चरित्र

मुहम्मद ﷺ का चरित्र

Latest Prophet as Mercy
Share this post
  • 368
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    368
    Shares

मुहम्मद ﷺ का चरित्र: हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) का जीवन चरित्र ख़ुदा और इस्लाम की सच्चाई का यह एक बहुत बड़ा निशान और महान प्रमाण है कि मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के जीवन की परिस्थितियां (हालात) जितनी स्पष्ट हैं किसी अन्य नबी के जीवन की परिस्थितयां उतनी स्पष्ट नहीं। इसमें कोई सन्देह नहीं कि उन आरोपों के निवारण के पश्चात एक इंसान जिस साफ़ दिल के साथ मुहम्मद रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के अस्तित्व से प्रेम कर सकता है अन्य किसी मनुष्य के अस्तित्व से इतना प्रेम कदापि नहीं कर सकता, क्योंकि जिनके जीवन गुप्त होते हैं उनके प्रेम में विघ्न (रुकावट) पड़ जाने की सदैव आशंका रहती है। मुहम्मद रसूलुल्लाह (स.अ.व.) का जीवन तो एक खुली पुस्तक है। शत्रु के आरोपों का समाधान हो जाने के पश्चात् कोई ऐसा पहलू नहीं रहता कि जिस पर दृष्टिपात करने पर हमारे समक्ष आप (स.अ.व.) के जीवन का कोई नया दृष्टिकोण आ सकता हो, न कोई रहस्य शेष रहता है जिसके प्रकट होने के पश्चात् किसी अन्य प्रकार की वास्तविकता हम पर प्रकट होती हो। ईश्वरीय ग्रन्थों को उचित अर्थों में लोगों के मस्तिष्कों में दृढ़तापूर्वक प्रविष्ट कराने के लिए अनिवार्य होता है कि उसके साथ उच्च आदर्श भी हो और सर्वोच्च आदर्श वही हो सकता है जिस पर वह किताब अवतरित हुई हो। यह रहस्य सूक्ष्म और दार्शनिकतापूर्ण है और अधिकांश धर्मों ने तो इस के मर्मको समझा ही नहीं। अस्तु, सनातन वेदों को प्रस्तुत करता है परन्तु वेदों को लाने वाले ऋषियों और मुनियों के इतिहास के जीवन बारे में बिल्कुल मौन है। हिन्दू धर्माचार्य इसकी आवश्यकता को आज तक भी नहीं समझ सके

बहरहाल विभिन्‍न धर्मों में अपने मुख्य स्रोत से दूरी के कारण इस प्रकार की ग़लत धारणाएं उत्पन्‍न हो गई हैं या यों कहो कि मनुष्य के मानसिक विकास के पूर्ण न होने के कारण प्राचीन युग में उन वस्तुओं के महत्त्व को समझा ही नहीं गया, परन्तु इस्लाम में प्रारम्भ ही से इस बात के महत्त्व को समझा गया। एक बार किसी ने रसूले करीम (स.अ.व.) की पत्नी हज़रत आइशा रज़ि.. से प्रश्न किया कि रसूले करीम (स.अ.व.) के शिष्टाचारों के संबंध में कछतो बताइए तो आपर ज़ि. ने फ़रमाया – आप के शिष्टाचारों का क्या पूछते हो— आप जो कुछ कहा करते थे क़ुरआन करीम में उन्हीं बातों का आदेश है तथा क़ुरआन की सैद्धान्तिक शिक्षा आप के अमल (क्रियात्मक आचरण) से अलग नहीं है। प्रत्येक आचरण जिसका क़ुरआन में वर्णन किया है उस पर आप का क्रियात्मक आचरण था और प्रत्येक क्रियात्मक आचरण जो आप करते थे उसी की क़ुरआन करीम में शिक्षा है। यह कैसी उत्तम बात है। ज्ञात होता है कि रसूले करीम (स.अ.व.) के शिष्टाचार इतने विशाल और इतने उच्चकोटि के थे कि एक युवती जो शिक्षित भी नहीं थी उसके ध्यान को भी इस आचरण तक आकृष्ट करने में सफल हो गए। हिन्दू, ईसाई, यहूदी और मसीही दार्शनिक जिस बात के मर्म को न समझ सके, हज़रत आइशा रज़ि. उस बात के मर्म को समझ गईं तथा छोटे से वाक्य में आप ने यह सूक्ष्म तत्व स्पष्ट कर दिया कि यह कैसे हो सकता है कि एक सत्यनिष्ठ और सदात्मीय मनुष्य संसार को एक शिक्षा दे और फिर उस पर स्वयं आचरण न करे अथवा स्वयं उस शुभ कर्म पर आचरण करे और उसे संसार से गुप्‍त रखे। अतः तुम्हें मुहम्मद रसूलुल्लाह (स.अ.व.)के शिष्टाचार मालूम करने के लिए किसी इतिहास की आवश्यकता नहीं, वह एक सत्यनिष्ठ और सदाचारी मनुष्य थे, जो कहते थे वह करते थे और जो करते थे वह कहते थे। मुहम्मद ﷺ का चरित्र जानने के लिए ऐ लोगो क़ुरआन पढ़ो और मुहम्मद रसूलुल्लाह को समझो।

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ ❁ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيْمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيْمَ ❁ إنَّكَ حَمِيْدٌ مَجِيْدٌ ❁ اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ ❁ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيْمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيْمَ ❁ إنَّكَ حَمِيْدٌ مَجِيْدٌ

Read More Articles: http://islamshantihai.com/category/prophet-as-mercy/

Facebook Comments

Share this post
  • 368
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    368
    Shares
Tagged

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *