रमज़ान में आपके जीवन को बदलने के लिए टिप्स

रस्मों से परे: रमज़ान में आपके जीवन को बदलने के लिए टिप्स

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जब रौशनी आती है तब अंधेरों को जाना ही पड़ता है। मुझे यक़ीन है कि हम सभी ने यह मुहावरा सुना होगा और इस मुहावरे का एक सरल उदाहरण रमज़ान के महीने का अभ्यास है। रमज़ान का महीना, सही मायने में, हमें मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी सिखाता है। कोई शक नहीं, रमज़ान का महीना साल में एक बार 29 या 30 दिनों के लिए प्रशिक्षण अवधि की तरह है। पूरी दुनिया के मुस्लमान, सुबह से शाम तक बिना कुछ खाये-पीये, रमज़ान के महीने में रोज़े रखते हैं। एक पल के लिए इस महीने की गंभीरता को महसूस करने की कोशिश करें, जहां कोई दिन भर ख़ाली पेट रहता है और वह भी अपनी मर्जी से। सभी संसाधन या जेब में पर्याप्त पैसे होने के बावजूद जिससे वह अपना पेट भर सकता है, लेकिन नहीं! उसने पूरे महीने के लिए रोज़े की निरंतर स्थिति में रहने का फैसला किया। आइए देखें कि यह कठिन प्रशिक्षण मानवता के लिए कैसे उपयोगी है:

भूख

वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम के अनुसार, दुनिया में 82.1 करोड़ लोग (यानि दुनिया की आबादी में 9 में 1 से ज़्यादा लोग) ऐसे हैं जिन्हें खाने के पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है।

रमज़ान के महीने में ज्यादातर समय हमें भूख और प्यास का दर्द महसूस होता है। लेकिन एक मिनट रुकिए, क्या हम कभी उस दर्द और भूख और प्यास के बारे में सोचते हैं जो हमारे गरीबी से जूझ रहे भाई-बहन हर दिन महसूस करते हैं? क्या हम अपने आप से यह सवाल पूछने के लिए जागरूक हैं?

क़ुरआन कहता है:

और वे मुहताज, अनाथ और क़ैदी को खाना उसकी चाहत रखते हुए खिलाते है, “हम तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए तुम्हें खिलाते है, तुमसे न कोई बदला चाहते है और न कृतज्ञता ज्ञापन (76:8-9)

या भूख के दिन खाना खिलाना, किसी निकटवर्ती अनाथ को, या धूल-धूसरित मुहताज को; फिर यह कि वह उन लोगों में से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की , और एक-दूसरे को दया की ताकीद की वही लोग है सौभाग्यशाली (90: 14-18)

अल्लाह क़यामत के दिन कहेगा:
ऐ आदम की संतान: मैंने तुमसे खाना मांगा और तुमने मुझे नहीं खिलाया। वह कहेंगे: हे प्रभु, और हम तुझे कैसे खिलाते जबकि तू सारे ब्रम्हांड का पालनहार है? अल्लाह कहेगा: क्या तुम नहीं जानते थे कि मेरे एक बन्दा तुम से खाना मांगता रहा और तुमने उसे नहीं खिलाया? क्या तुम्हे नहीं पता था कि अगर तुमने उसे खिलाया होता, तो आज निश्चित रूप से तुम्हे ईमान मिलता।  (मुस्लिम 2569)

क्रोध प्रबंधन

एक आदमी ने पैग़म्बर मुहम्मद (ﷺ) से कहा, “आप मुझे सलाह दीजिये!” पैग़म्बर मुहम्मद (ﷺ) ने कहा, “गुस्से और उग्रता मत किया करो।” आदमी ने बार-बार पूछा, और पैग़म्बर मुहम्मद (ﷺ) ने कहा। प्रत्येक मामले में, “क्रोधित और उग्र मत बनो।” (साहि अल-बुखारी 6116)

पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने फरमाया: पहलवान वह नहीं जो लोगों को पछाड़ दे, बल्कि पहलवान वह है जो क्रोध के समय (अपने गुस्से को पछाड़ कर) अपने आप को वश में रखे। (बुख़ारी 6114 )

पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: रोज़ा एक ढाल है इसलिए कोई भी अश्लील या अपमानजनक बात या व्यवहार नहीं होना चाहिए। यदि कोई तुमसे लड़ता है या तुम्हारा अपमान करता है, तो तुम्हे कहने चाहिए-मैं रोज़े में हूँ (बुख़ारी 1894)

माफ़ करना

रमजान दया और करुणा का महीना है साथ ही सर्वशक्तिमान ईश्वर से अपने पापों की क्षमा मांगे का महीना भी है। सच हो ये है कि हम सब ईश्वर से अपने पापों और ग़लत कर्मों की माफ़ी मांगने में व्यस्त है। लेकिन लेकिन, क्या हमने ये विचार भी किया है कि हम दूसरों की ग़लतियों को भी माफ़ कर दें? ज़रा देखिये अर-रहीम अल्लाह ने पवित्र क़ुरआन में दूसरों को क्षमा करने के बारे में क्या कहा है:

बल्कि उन्हें चाहिए कि (उनकी ख़ता) माफ कर दें और दरगुज़र करें क्या तुम ये नहीं चाहते हो कि ख़ुदा तुम्हारी ख़ता माफ करे और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है [24:22]

पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: दया करो, और तुम पर दया की जाएगी; लोगो को माफ़ कर दिया करो और अल्लाह तुम्हे माफ़ कर देगा।

निस्संदेह, हम में से कोई ऐसा नहीं जो ग़लतियाँ नहीं करता, और अन्य लोग का कुछ हद तक अधिकारों नहीं मारता।

जब हम माफ़ी के बारे में सोचते हैं तो हम ज़्यादातर चाहते हैं की अल्लाह हमें माफ़ करदे और हम भूल जाते हैं कि यह कितना महत्वपूर्ण है कि हम भी लोगो को माफ़ कर दिया करें।

हम अल्लाह से अपने दृष्टिकोण को सुधारने और हमें उन लोगों में होने के लिए दुआ करते हैं जो इस महान विशेषता के अधिकारी हैं।

निस्संदेह, रमज़ान एक रौशनी का महीना है। चलो इस रमज़ान की रौशनी से अधेरों को दूर करें!

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