रमज़ान का मक़सद

रमज़ान का मक़सद

Latest Pillar of Islam Shuja Khan
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जैसा की हम जानते हैं रोज़ा इस्लाम के बुनियाद पांच सुतूनों में से एक सुतून (स्तंभ) है। पूरी दुनिया के मुस्लमान इस्लामी कैलेंडर के नौंवे महीने यानि रमज़ान में पुरे महीने के रोज़े रखते हैं। यही वह महीना है जिसने ईश्वर की अंतिम वाणी यानि क़ुरआन अवतरित हुआ जो समस्त मानवता के लिए मार्दर्शन है। जिज्ञासा में मनुष्य ये प्रश्न पूछ सकता है कि ये सन्देश मानवता के लिए क्यों मत्वपूर्ण है? इसका संक्षिप्त उत्तर ये है कि क़ुरआन में समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शन के साथ खुले साक्ष्य, प्रमाण और मापदंड है। जो मानवता का मार्गदर्शन तो करता ही है साथ ही ये सही और ग़लत में फैसला करने की कसौटी भी प्रदान करता है।

इतिहास इस बात का सदैव साक्षी रहा है कि खुले साक्ष्य और प्रमाण से मिलने वाला मार्गदर्शन हमेशा मानव जाति की प्रथम आवश्यकता रही है। उसी प्रकार, मनुष्य जब भी सही और ग़लत के चयन में दुविधा में होता है तब उसे मापदंड की आवश्यकता होती है।

क़ुरआन ने कहा:

रमज़ान का महीना जिसमें क़ुरआन उतारा गया इंसानों के मार्गदर्शन के लिए, और मार्गदर्शन और सत्य-असत्य के अन्तर के प्रमाणों के साथ। (2:185)

क़ुरआन के माध्यम से हमारा बनाने वाला ईश्वर ने पहली बार मानवता को रोज़े रखने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि कुरआन के पहले भी लोगों के लिए रोज़े अनिवार्य कर दिए गए थे। हमारा ईश्वर अंतिम ईशग्रंथ क़ुरआन में कहता है:

ऐ ईमान लानेवालो! तुमपर रोज़े अनिवार्य किए गए, जिस प्रकार तुमसे पहले के लोगों पर किए गए थे, ताकि तुम में तक़वा आजाए। (2:183)

तक़वा

और स्वयं “तक़वे ” से सुन्दर रोज़े का उद्देश्य क्या होगा? ईश्वर से ऐसी मोहब्बत हो जाना कि उसकी नाफ़रमानी करते हुए डर लगे, यही तक़वा है! और, बुराई को छोड़ना और ईश्वर के प्रेम के ख़ातिर बुराइयों से उसकी सुरक्षा की मांग करना।

जैसा कि हम जानते हैं कि माह-ए-रमज़ान हर साल एक बार आता है। यहाँ एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है, क्या एक महीने के रोज़े बाक़ी 11 महीनों के तक़वा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त होगा?

ये बात सत्य है कि एक महीने के रोज़े, बाक़ी 11 महीनों के तक़वा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त हैं। सरल शब्दों में, एक डॉक्टर किसी विशेष बीमारी को ठीक करने के लिए समय के साथ-साथ कितनी ख़ुराक दी जानी चाहिए ये भी जानता है। सबसे महत्वपूर्ण बात, डॉक्टर ये भी जानता है कि ख़ुराक का असर कितने समय तक बाक़ी रहेगा।

हमें दो बिंदुओं पर अपना आत्मा निरक्षण करने की ज़रुरत है:

  • क्या हम रमज़ान के महीने से वांछित परिणाम प्राप्त कर रहे हैं, अर्थात तक़वा?
  • और क्या इस तक़वे की गर्माहट हमारे अंदर अगले रमज़ान तक रहेगी?

नज़रअंदाज़ ना करें, यही आत्मा चिंतन का क्षण है और तक़वा को प्राप्त करने के लिए यही रमज़ान है!

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