Coronavirus Safety

Coronavirus के समय पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का आदेश।

Prophet as Mercy
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COVID-19 महामारी, सरकारों और समाचार संस्थाओं को दुनिया की आबादी को सबसे सटीक और सहायक सलाह प्रदान करने के लिए मजबूर कर रही है, क्योंकि यह बीमारी वास्तव में विश्व स्तर पर पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर उच्च मांग में हैं, और साथ ही ऐसे वैज्ञानिक भी जो इस महामारी केअध्ययन में लगे हुए हैं।

इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. एंथनी फौसी और मेडिकल रिपोर्टर डॉ. संजय गुप्ता जैसे विशेषज्ञ कह रहे हैं कि संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने की आशा में अच्छी स्वच्छता और संगरोध, या दूसरों से अलग-थलग करने का अभ्यास, COVID-19 से बचने के लिए सबसे प्रभावी उपकरण हैं।

क्या आप जानते हैं कि किसी और ने महामारी के दौरान अच्छी स्वच्छता और संगरोध का सुझाव दिया था।
मैं यहाँ बात कर रहा हूँ, इस्लाम के आख़िरी पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के बारे में।

जब तुम सुनलो कि किसी जगह प्लेग की वबा (महामारी) फैल रही है तो वह मत जाओ। लेकिन जब किसी जगह ये वबा (महामारी) फूट पड़े और तुम वहां मौजूद हो तो उस जगह से निकलो भी मत। Sahih al-Bukhari 5728

मुहम्मद (सल्ल.) ने लोगो को सफाई और स्वच्छता के लिए प्रोत्साहित किया जो लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रखेंगे। पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) की निम्नलिखित हदीस करें:

सफाई और पाकी (पवित्रता) आधा ईमान है। Sahih Muslim 223

“उठने के बाद अपने हाथ धोएँ; आप नहीं जानते कि आपके सोते समय आपके हाथ कहाँ कहाँ चले गए हों।”

“खाने की बरकतें (blessings) खाने से पहले और बाद में हाथ धोने में निहित है।”

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) ने लोगों को हमेशा चिकित्सा उपचार और दवा लेने के लिए प्रोत्साहित किया: “चिकित्सा उपचार का उपयोग करें,” उन्होंने फ़रमाया कि अल्लाह ने कोई ऐसी बीमारी नहीं बनायीं जिसका इलाज न बनाया हो, सिवाए बुढ़ापे के। Sunan Abi Dawud 3855

इस्लाम ने विश्वास और तर्क में संतुलन स्थापित किया। इस्लाम का कोई भी विश्वास ऐसा नहीं जो तर्क से बहार हो । आज के वक़्त में कुछ लोगो का कहना है कि अगर अल्लाह महान है तो उसने काबे में तवाफ़ क्यों रुकने दिया। जैसा कि मैंने पहले बताया कि इस्लाम ने विश्वास और तर्क में संतुलन स्थापित किया। इस्लाम एक धर्म – जो जीवन की हर स्तिथि और समय में मनुष्य को मार्गदर्शन देता है। इस्लाम किसी अंध विश्वास का नाम नहीं, बल्कि इस ब्रम्हांड के बनाने वाले के नियमों का नाम है। उसने हमें क़दम-क़दम पर मार्दर्शन दिए।

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) ने एक आदमी को देखा कि वह अपने ऊंट को बिना बांधे ही छोड़ रहा था। पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) ने उस आदमी से पूछा, “तुम अपने ऊँट को क्यों नहीं बाँधते?” उसने उत्तर दिया, “मैंने अपना भरोसा अल्लाह में रखा।” पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) ने कहा, “पहले अपने ऊंट को बांधो, फिर अल्लाह पर अपना भरोसा रखो।” Jami at-Tirmidhi Vol. 4, Book 11, Hadith 2517

मुहम्मद (सल्ल.) ने लोगों को हमेशा धार्मिक मार्गदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन उन्होंने आशा व्यक्त की कि लोग स्थिरता, सुरक्षा और कल्याण के लिए बुनियादी सावधानी बरतें जो धर्म का ही एक हिस्सा हैं।

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