मुसलमान कौन है? (आदर्श मुसलमान)

मुसलमान कौन है? (आदर्श मुसलमान)

Akbar Ali Khan Islam is Peace Latest
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मुसलमान कौन है? (आदर्श मुसलमान)

लोगों में ये बात होना बड़ी आम है की क्या करें जो हम इस्लाम पर सही तरीके से चलते रहे और अल्लाह हमसे राज़ी हो जाये, बहुत से लोग ये मान लेते हैं की वो पहले ही बहुत अच्छे मुसलमान हैं और अल्लाह उनसे राज़ी हो जायेगा। इस सवाल का आना हर मुसलमान के लिये अच्छा है क्यूंकि वो लगातार खुद को चेक कर रहा है लेकिन इस के साथ ज़रूरी ये भी है की ज़रूरी क़दम उठाये जाएं जो हमें एक बेहतरीन मुसलमान बना सकें। क्यूंकि यही तरीक़ा रसूलल्लाह के साथियों का भी था वो लगातार ये देखते रहते थे की कहीं वो अपनी किसी हरकत से अल्लाह को नाराज़ न कर दें ।

क़ुरआन का जवाब (मुसलमान कौन है? आदर्श मुसलमान)

क़ुरान ने हमें इसका जवाब दिया की कैसे एक बेहतरीन मुसलमान बना जा सकता है “तुम्हारे लियें रसूल अल्लाह में बेहतरीन नमूना है उस शख़्स के लियें है जो खु़दा और रोजे़ आखे़रत की उम्मीद रखता हो और खु़दा की याद बाकसरत करता हो (33:21)” यही वो एक तरीक़ा है जो हमें एक सही मुसलमान बना सकता है अगर इस आयत पर ग़ौर किया जाये तो इसमें ये नहीं कहा की रसूल के तरीक़े में एक बेहतरीन नमूना है बल्कि कहा की रसूल में एक बेहतरीन नमूना है जिसमे तरीक़ा तो आता है साथ ही मुकम्मल शख्सियत आ जाती है। लेकिन अब सवाल ये आएगा की रसूल में किस तरह बेहतरीन नमूना ढूंढे तो क़ुरान ही हमें बताता है “और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको सारे जहानों के लोगों के लियें रहमत बनाकर भेजा (21:107)” इसका मतलब जो आपकी शख्सियत की बुनियाद है वो रेहमत है और हमें अपनी जिंदिगी को रेहमत बनाना है वो भी सिर्फ किसी एक समुदाय के लिये नहीं बल्कि सब के लिये। रेहमत के कामों में वैसे तो बहुत से अच्छे काम हैं जैसे कमज़ोर लोगो की मदद करना सबसे अच्छे से मिलना, सच्ची बात करना, धोखा न देना, ये सारी बुनियादें हैं इनहैं रसूल अल्लाह ने कभी नहीं छोड़ा लेकिन इन सब के साथ एक और भी काम था जो आपने अपनी ज़िन्दगी में जब भी मौक़ा मिला किया बल्कि उसके लिये मौके बनाते रहे और वो था सारे इंसानों को उनकी कामयाबी का रास्ता बताना उनको सच्चाई बताते रहना ताकि सब बड़े नुक़्सान से बच जाएँ और हमेशा के लिये कामयाब हो जाएं।

रसूलअल्लाह की शख्सियत को न सीखने के नुक़सान (मुसलमान कौन है? आदर्श मुसलमान)

जब हमने रसूल अल्लाह की शख्सियत को आदर्श बनाना छोड़ दिया तो फिर हमारा वो रुतबा भी खत्म हो गया। अब चाहें हम सारी नमाज़ें पड़ते हो रोज़े रखते हों या फिर और कुछ इबादतें क्यूंकि अल्लाह ने ये इबादतें हमारी ज़िन्दिगियों को बेहतर बनाने के लिये रखी थीं इसलिए नहीं की हम इन से घमंड करने लगें और नमाज़ से बाहर निकलकर हम वही सब बुराईयों में शामिल हो जाएं। इसलियें दीन पूरी तरह से समझना और उस पर चलना बेहद जरूरी है वरना आधे अधूरे दीन के बहुत नुकसान हो सकते हैं अल्लाह ने कहा “तो फिर क्या तुम कुछ बातों पर ईमान रखते हो और कुछ से इन्कार करते हो बस तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि जि़न्दगी भर की रूसवाई हो और (आखि़रकार) क़यामत के दिन सख़्त अज़ाब की तरफ लौटा दिये जाए और जो कुछ तुम लोग करते हो खु़दा उससे ग़ाफि़ल नहीं है। (02:85)”

इसका मतलब ये भी नहीं की हम बिलकुल ही दीन से निकल जाएं क्यूंकि उसके अंजाम भी बेहद खतरनाक हैं हमारे लियें। इसलियें जो भी इबादत करें ये समझ कर करें की क्यों कर रहे हैं और उससे होने वाले असर को अपनी जिंदिगी में उतारें एक छोटा सा उदाहरण है नमाज़ का वक़्त जब हम नमाज़ पड़ने जाते हैं तो समय की बड़ी पाबन्दी होती है और 9 बजे होने वाली नमाज़ अगर 5 मिनट देर से हो तो सबको खलने लगता है यही अगर हम अपनी ज़िन्दगी में उतार दें तो दुनिया में एक बड़ी और कामयाब पहचान बना सकते हैं इसी तरह दीन के हर रुक्न के बेपनाह और हैरान कर देने वाले फायदे हैं लेकिन क्यूंकि हम उन्हें बस रस्मी तौर पर करने लगे हैं तो उनके फायदों से महरूम हैं। इसी तरह रसूल अल्लाह की ज़िन्दगी और शख्सियत को न समझने की भूल हमें अँधेरे में धकेल सकती है और हमें कोई भी दीन के नाम पर बहका सकता है लेकिन अगर आपको ये पता होगा की रसूल अल्लाह का तरीक़ा क्या था तो फिर आप साफ़ होंगे की क्या करना है और क्या नहीं किस तरह से लोगो से पेश आना है और क्या है जो कभी नहीं करना।

सच्चा रास्ता (मुसलमान कौन है? आदर्श मुसलमान)

रसूल अल्लाह का तरीक़ा रेहमत का था फिर चाहें वो कुछ भी हो और किसी के भी साथ क्यों न हो। आज मुसलामानों को कोई भी रास्ता क्यों नहीं मिल रहा है क्यों अँधेरे में भटक रहे हैं क्यूंकि ये पता ही नहीं है की करना क्या है और इससे भी ज़्यादा ज़रूरी ये की जानने की कोई मंशा भी नहीं है। इस सब का नतीजा ये हो रहा है की हम कोशिश तो कर रहे हैं की हालात सही जाएं लेकिन जो भी हम कर रहे हैं उससे चीज़ें और खराब हो रही हैं। शायद बहुत सो का इस बात पर यक़ीन भी नहीं है की यहाँ पर हर बात का हल मिल सकता है। जब रसूल अल्लाह ने लोगो के बीच अपना पैग़ाम रखा तो हालात और भी ज़्यादा खराब थे वो लोग जो आपकी बेपनाह इज़्ज़त करते अब आप से बचकर निकलने लगे थे बहुत से दुश्मन बन गए लेकिन आपने सच् का साथ नहीं छोड़ा न ही कोई ऐसा क़दम उठाया जिसके नुकसान दीन को उठाने पड़ जाते बल्कि आप प्यार और मोहब्बत से अपनी बाते बताते गए साथ ही उनके फायदे भी और फिर किसी तरह समझौता भी उन उसूलो से नहीं किया चाहें फिर वो अपने घरवाले ही क्यों न हों परवाह थी तो बस सच की। कुछ दिन तो लोगों ने आपका विरोध किया लेकिन फिर हमेशा के लियें आपके साथ हो गए। यही तरीक़ा है जो अगर हमने नहीं अपनाया तो न हम कभी कामयाब हो पाएंगे और न ही इस दुनिया में शान्ति और प्यार फैल सकेगा। ये तरीक़ा नहीं अपनाने की वजह से हमने रसूल अल्लाह पर भी बहुत से झूठे इलज़ाम लगवा दिए और उनका सही तरीक़े से हल या जवाब देने के बजाये हम लड़ने लगे जिसके नतीजे और भी बदतर हो गए। जब भी आप कुछ करें या किसी से कोई बर्ताव करना हो तो सोचें की अगर रसूल अल्लाह होते तो क्या करते ये आपको सही रास्ते की तरफ ले जायेगा।

अपनी ज़िन्दिगियों को कामयाब बनाना है तो रसूल अल्लाह का सच्चा उम्मती बनिए जो की सारे जहांन के लियें रेहमत थे।

क्या पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ इस्लाम के संस्थापक थे?

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