मुसलमानों

मुसलमानों को अपनी हालत सुधारने के लिए क्या करना चाहिए?

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मुसलमानों को अपनी हालत सुधरने के लिए सबसे पहले अपना आत्म-निरीक्षण करना होगा। उन्हें अपने आपको उन चीज़ो से अवगत करना होगा जिनसे उनकी तरक्की हो और उन चीजों से अपने आपको दूर रखना होगा जो उनकी तरक्की के रास्ते में रूकावट हो। यहाँ तरक्की से मुराद उनकी वो तरक्की है जिससे उनको दुनिया में जाने जाएँ, जैसे कि और कौमों को जाना जाता है ।

इसके लिए सबसे पहले मुसलमानों को उच्च स्तरीय शिक्षा लेनी पड़ेगी जो कि अलग अलग क्षेत्रों से सम्बंधित हो जैसे कि चिकित्सा विज्ञान, प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा, कानून शिक्षा और व्यवसाय आधारित शिक्षा। इसके अलावा मुसलमानों अपने हालत सुधारने के लिए न्यायिक सेवा, सिविल सेवा, राजनीति और नौकरशाही का हिस्सा भी बनना बहुत ज़रूरी है। ये सारी चीज़ें किसी कौम के आगे बढ़ने के लिए काफी हद तक मददगार साबित होती हैं। मुस्लिम कौम एक कौम की हैसियत से बहुत पिछड़ी हुए कौम है जो कि आज के ज़माने के हिसाब से अपने आपको आगे नहीं बढ़ रही है। वास्तव में कौमों का मुस्तक़बिल उसके नौजवानों से होते है और हम मुसलमानों के नौजवानों को देख सकते है कि वे किस ओर जा रहे हैं। मुस्लिम बुद्धिजीवियों को अपने नौजवानों की स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है ताकि उनको सही राह दिखाई जाए। इसके अलावा लोगों को अपनी अपनी क़ाबिलियत के हिसाब से अपने अपने क्षेत्र में कुछ काम करना चाहिए। इसके लिए हर एक मोहल्ले के हिसाब से छोटी छोटी समितियां बने उन समितियों में  माहिरीन हज़रत आगे बढ़ें और लोगों की हर ऐतबार से मदद करें। इन समितियों के कार्य का भी एक निश्चित अंतराल पर आकलन हो ताकि इसमें आवश्यकता अनुसार परिवर्तन किया जा सके।

मुसलमानों का मुस्तकबिल को सही राह पर लाने के लिए सबसे बेहतर एक ही विकल्प है कि हम अपनी नई नस्ल को तालीम याफ्ता बनायें और तालीम/शिक्षा सिर्फ एक ही तरह की न हो बल्कि समग्र एवं समावेशी शिक्षा हो।

इस्लाम – मानवता के लिए सन्देश

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