मुसलमानों के मौजूदा हालात का हल क्या है?

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इस्लाम, मुसलमान और मौजूदा हालात, ये वो सवाल है जिसका जवाब हर मुस्लिम बुद्धजीवी अपनी समझ के हिसाब से ढूंढ रहा है। कोई राजनीति में इसका जवाब ढूंढने की कोशिश कर रहा है, तो कोई शिक्षा संस्थान के अंदर इसके मिलने की बात कर रहा है। मगर ये  तरीके अधूरे हैं क्योंकि धर्म पूरे जीवन के हर पहलू  में मार्ग दर्शन करने वाले नियमों का नाम है। जिसमें समाज, समाजी ज़िन्दगी, न्याय और वो तमाम चीज़ें शामिल हैं जो इंसानी जीवन से जुड़ी हुई हैं। कोई भी समाज उस वक़्त तक अच्छा या खु़शहाल समाज नहीं कहलाता है जब तक उसमें ये तमाम चीज़ें  अपने आपसी सुहृद में ना हों। मुसलमानों के आज के बिगड़ते हालात इसी टूटी हुई कड़ी का नतीजा हैं। इसके अलावा  आज के मुसलमानों के लिए इस बात को समझना बहुत ही ज़रुरी है कि उनके इस हालात में पहुंचने के क्या क्या कारण है।  

मौजूदा हालात में मुसलमानों के लिए सबसे ज़रूरी है जागरूक होना, यानी दीन/धर्म को सही तरह से समझना और समझाना। नई नस्ल की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि उसने धर्म को मस्जिदों से बाहर निकलते नहीं देखा, वो यह नहीं जान पाई कि धर्म जीवन शैली का नाम है। उसको ये ना बताया गया और ना ही दिखाया गया। शिक्षा संस्थान में पढ़ने वाले मदरसे वालों को अनपढ़ समझते है और मदरसे वाले इनको गुमराह समझते है। वक़्त की ज़रूरत है कि ये दूरी मिटाई जाए और मिलकर काम किया जाए। एक दूसरे से काम की बातें सीखी जाएं और उनको आगे बढ़ाया जाए। वरना वो दिन दूर नहीं जब नई नस्ल का एक बड़ा हिस्सा नास्तिकता की अंधेरी कोठरी में ख़ुद को बंद कर लेगा। ये ज़रूरी है कि दीन को एक जीवन शैली के रूप में पेश किया जाए और हर मैदान में इन्ही नियमों को लेकर इंसानी हमदर्दी के साथ उतरा जाए तो ये हालात बदलते हुए नज़र आएंगे।

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