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Kaaba center of Earth | काबा-पृथ्वी की नाभि

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Kaaba center of earth | काबा-पृथ्वी की नाभि | (Kaaba – The Navel of the Earth)

बात शुरू करने से पहले ऋग्वेद का एक मंत्र देख लें:

इळायास्त्वा पदे वयं नाभा पृथ्वि्या अधि …. धीमहि
हम तुम्हें पृथ्वी की नाभि पर ईश्वर के स्थान में धारण करें! ऋग्वेद (3:29:4)

is kaaba located in the centre of the earth

ये शब्द “पृथ्वी की नाभि” वेद में आया है, क़ुरआन में नहीं आया! इळायास्त्वा मतलब खुदा का घर, अरबी में बैतुल्लाह! वो बैतुल्लाह नाफ ए ज़मीन पर है, हम वहां तुम्हें अपनाएं! नाफ़ के बारे में एक चीज़ समझ लें, कि हर किसी के शरीर में नाभि पूरे शरीर के अनुपात के अनुसार एक ख़ास स्थान पर है।

यदि हम पूरे शरीर की लंबाई को x मान लें, इसी प्रकार धरती की लंबाई उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक की भी x (20020 किमी०) मान लें, वैसे गोल चीज़ में कुछ ऊपर नीचे नहीं होता, पर यदि वो घूम रही है तो जो उसकी धुरी होगी, उसको उसकी लंबाई माना जा सकता है, क्योंकि अब ऊपर नीचे का संकल्पना आ गयी! सबसे ऊपर उत्तरी ध्रुव, सबसे नीचे दक्षिणी ध्रुव, ये ज़मीन के लिए लंबाई यानी x हो गई, जिसकी लंबाई 20020 किमी० है, जिसको आप गूगल अर्थ से एक्यूरेट चेक कर सकते हैं।

अब शरीर में नाभि से नीचे तक की लंबाई को y मान लीजिए, अब x में से y निकाल देंगे तो सर से नाभि तक की लंबाई पता चल जाएगी, उसको z मान लीजिए। अब काबे को अगर हम नाभि मान लें तो पृथ्वी के लिए काबे से दक्षिणी ध्रुव तक की लंबाई y (12375  किमी०) मानी जाएगी।

अब x में से y को घटाएंगे तो z पता चल जाएगा जो सर से नाभि तक की लंबाई है, यानी पृथ्वी के लिए उत्तरी ध्रुव से काबे तक की जो लंबाई है, तो पृथ्वी के लिए z = x-y = 20020-12375 = 7645 किमी० हो गई! यानी पृथ्वी के लिए सर से नाभि तक की लंबाई z (7645 किमी०) हो गई! सर से नाभि तक की दूरी थोड़ी कम होती है, नाभि से पैरों तक की दूरी उसके मुकाबले ज़्यादा होती है! अब हम एक कैलकुलेशन करेंगे।

kaaba the centre of the earth

लेकिन यहां बीच में पहले लैटिट्यूड और लोंगीट्यूड की भी बात कर लेते हैं

काबे का लैटिट्यूड 21.42 N है, और लोंगीट्यूड 20.82 E है, इनके अनुसार x = 180° होगा, y = 21.42° + 90° = 111.42° होगा, और z = x-y = 180° – 111.42° = 68.58° होगा!

अब एक कैलकुलेशन देख लें!

लेकिन इससे पहले एक बार इन x, y, z का मतलब याद कर लें:

x = सर से पैर तक की लंबाई

y = नाभि से पैर तक की लंबाई

z = सर से नाभि तक की लंबाई

अब देखें:

x/y = 180/111.42 = 1.6

y/z = 111.42/68.58 = 1.6

ये 1.6 गोल्डन रेशो कहलाता है, दुनिया की बोहोत सी हसीन चीज़ों में व नेचर में ये रेशो मौजूद है, ये हर इंसान का इतना ही आता है।

ये कैलकुलेशन तो हमने लैटिट्यूड और लोंगीट्यूड के हिसाब से की, अब जो हम ऊपर बात कर रहे थे, पृथ्वी की लंबाई के हिसाब से भी इसी कैलकुलेशन को दोहराते हैं!

kaaba the centre of earth

जहां,

x = 20020 किमी०

y = 12375 किमी०

z = 7645 किमी०

x/y = 20020/12375 = 1.6

y/z = 12375/7645 = 1.6

लंबाई के हिसाब से भी हमें काबे को पृथ्वी की नाभि मानने पर गोल्डन रेशो प्राप्त होता है। ये यहां से साबित होता है कि काबा नाफ ए ज़मीन (पृथ्वी की नाभि) है। लेकिन अभी बात खत्म नहीं हुई, कुछ और हैरतअंगेज़ चीज़ें बाकी है, पहले आप क़ुरआन की कुछ आयतें देखें, फिर एक मंत्र देखेंगे:

اِنَّ اَوَّلَ بَیۡتٍ وُّضِعَ لِلنَّاسِ
निःसंदेह मानवजाति (की बंदगी) के लिए जो सब से पहले घर निर्मित हुआ…

अब आप अरबी की इस लाइन में अक्षर गिन लें–

इन्ना के 2, अव्वला के 3, बैता के 2+1 = 3, वुद़िआ के 3 और लिन्नास के 5…

कुल अक्षर 16 हो गए।

अब इस लाइन में इन्ना के अलिफ को सर मान लें, और लिन्नास के सीन को पैर मान लें।

इस लाइन में x = 16 हो गया, बैत का लफ्ज़ 2 और 1 में तोड़ा है, और नाफ से पैरों तक की लंबाई ज़्यादा होने की वजह से हम ने 2 को पैरों की तरफ जोड़ दिया और 1 को सर की तरफ जोड़ दिया, तो y = 5+3+2 = 10 हो जाएगा, और z = 2+3+1 = 6 हो जाएगा।

तो क्या मिला:

x = 16

y = 10

z = 6

x/y = 16/10 = 1.6

y/z = 10/6 = 1.6

बैत लफ्ज़ के बारे में ये बात याद रखें, कि इसको 1.5+1.5 नहीं किया जा सकता था, क्योंकि आधा अक्षर होता ही नहीं, इसे हमने इसलिए पूरा पूरा 2+1 में तोड़ा।

ये लफ्ज़ बैत आयत की इस लाइन के अंदर भी नाभि पर है। उसी सेम रेशो पर जिस पर काबा है।

Kaaba center of earth (Kaaba – The Navel of the Earth)

एक और आयत देखें:

جَعَلَ اللّٰہُ الۡکَعۡبَۃَ الۡبَیۡتَ الۡحَرَامَ
अल्लाह ने काबे को एक पवित्र/आदरणीय घर निश्चित किया…

अब आयत की इस लाइन के भी अक्षर गिनें:

जअला के 3, अल्लाहु के 4, काबा के 4+2 = 6, अल-बैत के 5, अल-हराम के 6…

यहां भी हमने बीच के लफ्ज़ काबा को दो हिस्सों 4 और 2 में बांटा है, ताकि पैरों की तरफ बड़ा नंबर और सर की तरफ छोटा नंबर लिया जा सके।

इसमें

x = 24

y = 6+5+4 = 15

z = 2+4+3 = 9

x/y = 24/15 = 1.6

y/z = 15/9 = 1.6

ये अल्लाह ने आयतों में भी रखा है, मुसलमानों तक को ये बात नहीं मालूम है, लेकिन कहते हैं कि काबा नाफ ए ज़मीन है, हालांकि क़ुरआन में ये अल्फ़ाज़ मौजूद नहीं है। तो ये पहले से जो बातें चली आ रही हैं, ये ख़ाली विश्वास की बातें नहीं हैं, इनको तो आज हम थियोरेटिकली और मैथमेटिकली साबित कर सकते हैं, कि जिस जगह को इंसान की नाभि कहते हैं, जगह के हिसाब से काबा ज़मीन के सापेक्ष में उसी स्थान पर है कि उसे पृथ्वी की नाभि या नाफ़ ए ज़मीन कहा जाए।

ये तो क़ुरआन की बात थी, अब वेद की भी देख लीजिए, और इससे हम कह सकते हैं कि कम से कम इस मंत्र के अंदर कोई लफ्ज़ इधर से उधर नहीं हुआ, ये अल्लाह की तरफ से नाज़िल हुआ था, और ये अल्लाह का कलाम था, जिसमें इंसानी चीज़ें अलग से शामिल तो हैं, लेकिन असल हकीकतें आज भी मौजूद हैं, वही ऋग्वेद का मंत्र देखें, जिसको शुरू में दिखाया था,

इस मंत्र को पूरा देखें:

इळायास्त्वा पदे वयं नाभा पृथ्वि्या अधि।
जातिवेदो नि धीमह्यग्ने हव्याय वोढवे।। ★ऋग्वेद (3:29:4)

इसमें हमने शब्द लिए हैं, इनके अलग अलग शब्द देखें:

z = इळायाः त्वा पदे वयं नाभा = 5 शब्द

y = पृथ्वि्या अधि जातिवेदो नि धीमहि अग्ने हव्याय वोढवे = 8 शब्द

x = 5+8 = 13 शब्द

x/y = 13/8 = 1.6

y/z = 8/5 = 1.6

ये गोल्डन रेशो कहलाता है, दुनिया की वो चीज़ें जिनमें ज़्यादा हुस्न होता है, उनमें गोल्डन रेशो होता है, हर इंसान में होता है, इंसान का जिस्म अल्लाह ने सबसे हसीन बनाया है, आप चाहे हुस्न को ख़ाली रंग की बुनियाद पर देखते हों, हुस्न तो असल में सबसे ज़्यादा मुनासिब को कहते हैं, सबसे ऐप्रॉप्रिऐट! तो इस खूबसूरत और हसीन जिस्म के अंदर ये रेशो मौजूद है, और उसी के आधार पर, काबा भी ज़मीन के सापेक्ष उसी जगह है, काबा नाफ ए ज़मीन (पृथ्वी की नाभि) है, क़ुरआन की दो आयात के अंदर भी वही रेशो मौजूद है, और वेद के मंत्र में मौजूद है, और ये लफ्ज़ ”नाभा पृथ्वि्या” तो वेद से आ रहा है, किसी हदीस में नहीं है, क़ुरआन में नहीं है, ये लफ्ज़ तो वहां से चला आ रहा है, मुसलमान बोलते हैं, आपको कहां से मालूम हो गया? रसूल अल्लाह स० ने बताया होता तो हदीसों में होता, तो मालूम कहां से हुआ? ये हिन्दुस्तानी मज़ाहिब के मानने वाले ज़ाहिर नहीं करते, इनको काबे से बोहोत अक़ीदत है, कहते नहीं हैं। ये इनके राज़ों में से एक राज़ है।

Kaaba center of earth | काबा-पृथ्वी की नाभि | (Kaaba – The Navel of the Earth)

I hope you have understood how Kaaba center of earth (Kaaba – The Navel of the Earth)

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I'm a Writer, trying to deliver the truth with meaningful words.

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Muhammad Amir Ansari
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