हिजाब

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जब फ्रांस ने मुख्य रूप से अपने मुस्लिम नागरिकों को निशाना बनाते हुए, हेडस्कार्फ़ पर प्रतिबंध लगाया, तो, लोगों में बहुत गुस्सा था।अमेरिका में 9/11 की घटना के बाद, दुनिया भर के मुसलमानों ने इस तरह के पक्षपातपूर्ण रवैये का सामना किया, जिसके परिणामस्वरूप कई घृणा अपराध हुए। 1 जुलाई 2009 को, एक 32 वर्षीय मिस्र की फार्मासिस्ट- ’मारवा एल शेरबीनी ’, जो कि 3 महीने की गर्भवती थी, उसके हेडस्कार्फ़ के लिए एलेक्स वाईन्स नाम के एक रूसी ने उन्हें चाकू मार दिया था। 11 अप्रैल, 2011 को, फ्रांस ने पूर्ण चेहरे के नक़ाब पर प्रतिबंध लगा दिया। फिर, एक काउंटर उपाय के रूप में, एक आंदोलन अस्तित्व में आया और लोगों ने 4 सितंबर को ’विश्व हिजाब दिवस’ के रूप में घोषित किया। कुछ स्थानों पर, इस वार्षिक कार्यक्रम को 1 फरवरी को मनाया जाता है, इसको एक न्यूयॉर्क निवासी, ‘नाज़मा खान’ द्वारा मुस्लिम और ग़ैर-मुस्लिम महिलाओं के लिए शुरू किया गया था, वो लोग एक दिन के लिए हिजाब का अनुभव करते हैं, जिन्होंने इसे कभी नहीं पहना हैं।

इस्लाम में कई विवादित मुद्दे हैं, लेकिन बहुत कम ऐसे विषय हैं जिन पर लगभग हर संप्रदाय के लोग सहमत होते हैं, और हिजाब उनमें से एक है और क्योंकि यह सर्वशक्तिमान ईश्वर का आदेश है, इसलिए हर मुसलमान को इसे मानना चाहिए। जब आप किसी भी धर्म को स्वीकार करते हैं, तो आप इसे पूरी तरह से स्वीकार करते हैं। उस क्षण से, जब आप इस्लाम को गले लगाते हैं, आपको अंत तक ईश्वर का पालन करना चाहिए।

“हे तुम विश्वासियों, पूरी तरह से पूरे दिल से इस्लाम में प्रवेश करो, और शैतान के नक्शेकदम पर मत चलो। वास्तव में वह आपके लिए एक खुला दुश्मन है ”- (बकरा: 208)

पुरुषों के लिए हिजाब

“महिलाओं को पूरी तरह से ढंकना और कपड़े पहनना चाहिए।” “उन्हें गैर-मेहरमों को नहीं देखना चाहिए या उनसे बात नहीं करनी चाहिए।” आपने काफ़ी लोगों से इस तरह की सलाह सुनी होगी, लेकिन हमारे समाज के वर्चस्व वर्ग का क्या? क्या उन्हें दूसरों का निरीक्षण करने की अनुमति है? क्या सड़कों, पार्कों …. आदि पर घूमते हुए, नियमित तौर से सड़क चलती महिलाओं का परीक्षण करना उनका जन्म सिद्ध अधिकार है या वे मजबूरन इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी से बंधे हैं?

क़ुरआन कहता है- “हे पैगंबर: ईमानवाले पुरुषों से कह दो कि वे अपनी निगाहें बचा कर रखें और अपने निजी अंगों की रक्षा करें। यही उनके लिए अधिक अच्छी बात है।वास्तव में, अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर रहती है कि वे क्या करते हैं। ”- (नूर: 30)

इसलिए, पहले हमें अपने लड़कों को सिखाना होगा, उन्हें उनके विपरीत लिंग का आदर करना सिखाना चाहिए।उन्हें उनकी मर्यादा बताएँ। नारीवाद को परे रखते हुए, ऊपर अद्भुत कुरान की आयत पर विचार करें। अल्लाह पुरुषों को हिजाब के बारे में सबसे पहले आदेश देता है। कुरान सभी के लिए समानता और न्याय के बारे में है। इसमें अल्लाह पहले हिजाब के बारे में पुरुषों को संबोधित करता है, फिर महिलाओं से बात करता है।

कई माता-पिता, जो अपनी बेटियों की सुरक्षा ध्यान में रखते हुए, लड़कियों के स्कूल या कॉलेज में उनका दाख़िला कराते हैं, वही अपने बेटों के स्कूल के लिए परेशान नहीं होते, वो उनका दाख़िला ’को-एड स्कूल’ में बड़े चाव से करवाते हैं। ऐसा करते हुए, वे अपनी बेटियों की रक्षा तो कर लेते हैं, लेकिन क्या दूसरों की बेटियां उनके बेटों से सुरक्षित हैं? हिजाब पुरुषों और महिलाओं दोनो के लिए है, और समान रूप से महत्वपूर्ण भी है।

स्त्रियों के लिए हिजाब

“और ईमान वाली स्त्रियों से कह दो कि वो भी अपनी निगाहें बचा कर रखें। और अपने निजी अंगों की रक्षा करें, और अपना श्रिंगार प्रकट ना करें, सिवाए इसके जो खुला रहता है। और अपने सीनों पर दुपट्टे डाल रखें। और अपना श्रिंगार किसी पर ज़ाहिर ना करें, सिवाए अपने पतियों के, या अपने पिताओं के, या अपने पतियों के पिता के, या अपने बेटों के, या पतियों के बेटों के, या अपने भाइय्यों के, या भतीजों के, या अपने भाँजों के या मेलजोल की स्त्रियों के या जो उनकी अपनी मिलकिय्यत में हों उनके, या उन अधीनस्थ पुरुषों के जो उस अवस्था को पार कर चुके हों जिससे स्त्री की ज़रूरत होती है, या उन बच्चों के जो स्त्रियों के पर्दे की बातों से परिचित ना हों। और स्त्रियाँ अपने पाँव धरती पर मारकर ना चलें कि अपना जो श्रिंगार छुपा रखा हो वो मालूम हो जाए। ऐ ईमानवालों! तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो।” (नूर:31)

पूर्व इस्लामी युग में भी महिलाएं अपने सिर को ढाँका करती थीं। लेकिन दुपट्टे के छोर को कंधों के पीछे की ओर रखती थीं, जिससे उनकी गर्दन खुली रहती थी।

बहुत सी महिलाएं प्रार्थनाओं, उपवासों, दान और सभी चीजों का बहुत पालन करती हैं … लेकिन, वे इस आज्ञा की उपेक्षा करती हैं। बेशक यह महत्व के मामले में इन सबके बाद आता है। लेकिन हिजाब भी अल्लाह का एक आदेश है। इसके अलावा, यह गरिमा बनाए रखने और ईव-टीजिंग और दुर्व्यवहार से बचाने में मदद करता है।

वहीं कुछ लड़कियां जो खुद को “हिजाबी” कहती हैं, दुपट्टा और अबाया इस ढंग से पहनती हैं कि इसका पूरा उद्देश्य ही पलट जाता है। या तो वो बहुत चमकीला-भड़कीला होता है या फिर शरीर पर कसा हुआ होता है। हिजाब के नाम पर इतना कसा हुआ गाउन या कपड़े पहनना वास्तव में हिजाब नहीं है। कृपया ख़ुद को धोका ना दें। आपको हिजाब के मूल अर्थ और इसके कारण को समझने की आवश्यकता है। यह सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, यह आपका अधिकार है, आपकी पहचान है।

“ऐ नबी! अपनी पत्नियों और अपनी बेटियों और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे अपने ऊपर अपनी चादर का कुछ हिस्सा लटका लिया करें, इससे इस बात की अधिक सम्भावना है कि वे पहचान ली जाएँ और सताई ना जाएँ। अल्लाह बहुत क्षमाशील, दयावान है।” (अहज़ाब:59)

घर से बाहर जाने के कुछ शिष्टाचार होते हैं और कुरान हमें उस बारे में सिखाता है और आज्ञा भी देता है। इसलिए, अगली बार बाहर जाने से पहले या एक गैर महरम अतिथि के आने से पहले, कृपया इसे चेकलिस्ट के साथ जांचना

सुनिश्चित करें-
पोशाक ढीली होनी चाहिए
ड्रेस का रंग बहुत उज्ज्वल नहीं होना चाहिए
आपके कपड़े पारदर्शी तो नहीं हैं
कपड़े आकर्षक बनाने के लिए, सितारे-मोती से सजी कशीदाकारी तो नहीं की गयी है
कपड़ो में ग़ैर मज़हबी मुशाबिहत नहीं होना चाहिए
कपड़ों को विपरीत लिंग के जैसा नहीं होना चाहिए
कृपया लोगों के हिसाब से अपने कपड़ों का चुनाव ना करें, याद रखें कि आप हर समय हर किसी को खुश नहीं कर सकते। ईश्वर को खुश रखें, यह अधिक महत्वपूर्ण है।

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